गुरुवार, 30 मार्च 2017

मेरे वतन की नई तस्वीर बन रही है



💥68 साल पहले- एक गुजराती ने देश को"अंग्रेजों"से,"मुक्त"किया था !!

💥अब 68 साल बाद,एक गुजराती ने,देश को"कांग्रेस"से,"मुक्त"किया है !!

💥पहले वाला-गुजराती 'नोटो' पर छा गया !!!

💥अभी वाला-गुजराती 'वोटों' पर छा गया !!

💥 ऐ दोस्त - खिडकिया खोल के देखने दे,मुझे ..?????

💥मेरे वतन की,"नई तस्वीर"बन रही है !!!

🌻आज,भारत- फिरसे"आजाद" हुआ !!

💥➖पहले - "इग्लेड की रानी से!

💥 और आज :--💥

💥➖" ------------- से " !!!पैसे कमायें बिना इन्वेस्ट के अपने मोबाइल से

💥➖जो,पढ़ सके न खुद, किताब मांग रहे हैं ???

💥➖खुद, रख न पाए, वो हिसाब मांग रहे हैं ????

💥➖जो, कर सके न साठ साल में- कोई विकास देश का, वो 2 साल में जवाब मांग रहे हैं ????

💥➖आज - गधे गुलाब मांग रहे हैं?? चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे हैं??

💥➖जो Loot te रहे देश को,60 सालों तक ???

   💥सुना है,आज वो- 2 साल का हिसाब मांग रहे हैं??

💥 वर्षों बाद - एक नेता को,माँ गंगा की आरती करते देखा है !!

💥वरना - अब तक, एक परिवार की समाधियों पर,"फूल चढ़ते"देखा है।!!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,अपनी"मातृभाषा"में बोलते देखा है ।!

💥वरना - अब तक,रटी रटाई "अंग्रेजी"बोलते देखा है।!

💥 ➖अब तक -एक परिवार की मूर्तियां बनते देखा है।!

💥वर्षों बाद-: एक नेता को,"संसद की माटी चूमते"देखा है !!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,"देश के लिए रोते"देखा है !!

💥वरना - अब तक,"मेरे ---मार दिया"कह कर,वोटों की भीख मांगते देखा है।!

💥➖पाकिस्तान को घबराते देखा है !!

💥➖अमेरिका को झुकते देखा है।

💥इतने वर्षों बाद-भारत माँ को, खुलकर"मुस्कुराते"देखा है।

💥आप सभी से"निवेदन"है, इस मेसेज को,पुरे भारत ke,

हर एक नागरीक तक,पहुचाने में मेरी मदद करें! !! शेयर लिंक प्लीज़

बुधवार, 29 मार्च 2017

हमलोगों के स्कूल टाईम की आश्चर्यजनक बातें


हमारे स्कूल टाईम की वो लड़कीया भी किसी आतंकवादी से कम नही हुआ करती थी...
जो टिचर के क्लास मे आते ही याद
दिला देती है ..

सर आपने टेस्ट का बोला था...
😂
😂

आजकल के बच्चे क्या समझेंगे
😂
😂


हमने किन मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई की है,

कभी कभी तो मास्टर जी हमें
मूड फ्रेश करने के लिये ही कूट दिया करते थे
😂
😂


मन की बात...

आज कल के बच्चे रिफ्रेश होने के लिए जहाँ वाटर पार्क, गेम सेंटर जाने की जिद करते हैं ...

वहीं हम ऐसे बच्चे थे जो मम्मी-पापा के एक झापङ से ही फ्रेश हो जाते थे.!
😂
😂
😂


वो भी क्या दिन थे....????
जब बच्चपन में कोई रिश्तेदार जाते समय 10 ₹ दे जाता था..

और माँ 8₹ टीडीएस काटकर 2₹ थमा देती थी....!!!
😁
😁
😁

घर का T.V बिगड़ जाए
तो माता-पिता कहते हैं..
बच्चों ने बिगाड़ा है;

और अगर बच्चे बिगड़ जाएं तो
कहते है..
T.V. ने बिगाड़ा है !!!
😛😛😛😛😛😛😛😛

आज कल के माँ बाप सुबह स्कूल बस में बच्चे को बिठा के ऐसे बाय बाय करते हैं जैसे पढ़ने नहीं विदेश यात्रा भेज रहें हो....

और
एक हम थे जो रोज़ लात खा के स्कूल जाते थे...
😤😤😤😤😤😤😤😤

4-4साल के बच्चे गाते फिर रहे हैं
"छोटी ड्रेस में बॉम्ब लगदी मैनु"

साला जब हम चार साल के थे तो 1 ही वर्ड याद था..
वही गाते फिरते थे...
"शक्ति शक्ति शक्तिमान-शक्तिमान"
😇😇😇😇😇😇😇😇

भला हो हनी सिंह और जॉन सीना का..
जिसने आज के बच्चो को फैशन के नाम पे बाल बारीक़ छोटे रखना सीखा दिया..

हमारी तो सबसे ज्यादा कुटाई ही बालो को लेके हुई थी।।
हम दिलजले के अजय देवगन बनके घूमते थे,
और जिस दिन पापा के हाथ लग जाते उस दिन नाईं की दुकान से क्रन्तिविर के नाना पाटेकर  बनाके ही घर लाते थे।।।

*Special Doston Ko Snd Kro*
*Love you friends*

मंगलवार, 28 मार्च 2017

यूपी को क्राइम मुक्त के लिये सरकार ने शिकायत व्हाट्सअप नंबर जारी किया

यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा क्राइम मुक्त यूपी का अभियान जारी है और इसी कड़ी में उनके द्वारा यह एक व्हाट्सअप नंबर जारी किया गया है गया है कि इस नंबर पर की गई शिकायत पर 3 घंटे के भीतर ऐक्शन लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से मोबाइल नंबर 09454404444 नंबर जारी किया गया। सरकार की ओर से कहा गया है कि जनता अपनी शिकायत इस नंबर पर वॉट्सऐप मैसेज भेजकर कर सकती है। अधिकारी तुरंत इस पर ऐक्शन लेंगे। आप 
सोमवार को ही यूपी सरकार ने बोर्ड एग्जाम मे नकल रोकने के लिए भी हेल्पलाइन( 0522-2236760, 9454457241) हेल्पलाइन नंबर जारी किया। लोगों से नकल रोकने के लिए सहयोग की अपील की गई है। शिकायतों के लिए लखनऊ में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां जहां नकल की शिकायत आप  सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक फोन के माध्यम से शिकायतें नोट कराई जा सकती हैं। जिस पर तुरंत एक्शन होगा

यह खबर सिर्फ हिंदुओं के लिये


सनातनखबर स्रोत धर्म में LEATHER की चीजें प्रयोग करना साफ़ मना है। असल में LEATHER का उपयोग INDIAN ने कभी किया ही नहीं था। INDIA में सदियों से ही कपड़े की बनी चीजों का इस्तेमाल होता आया है। अब सवाल ये है कि INDIA में LEATHER आया कहां।
मध्यकालीन हिन्दुस्तान में जब MUSLIM भारत में आये तो वह लोग भारत के अन्दर LEATHER लेकर आये थे। बाद में भारत में आने के बाद कई स्वाभिमानी जातियों को नीचा दिखाने के लिए और जब कई जातियों ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया गया तो इन जातियों से मरे पशुओं की खाल उतरवाकर, चमड़ा बनवाया गया था। खासकर गोचर्म को इस्लाम में परोक्ष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। सवाल आज के मुसलमान का नहीं है। क्योकि बुरे तो वो मुस्लिम थे जो विदेशी थे और इन्होनें ही भारत को बाँटने के लिए चमड़े और खासकर गाय के चमड़े पर जोर दिया था।
बगदाद के खलीफा ने अपने सेनापति मुहम्मद बिन कासिम को बैल की खाल में भरकर तीन दिनों तक कठोर यातना दी थी। आप कोई सनातन शास्त्र पढ़ लीजिये और इस तरह की सजा खोजिए। सनातन में पशु की खाल और उसके उपयोग जैसी चीजें मौजूद नहीं हैं। यह खाल और चमड़ा जैसी चीजें विदेशी मुसलमान भारत में लाये थे। मंदिरों को लुटने के लिए मंदिर के अन्दर गाय के खून को छिड़का जाता था. इस कार्य से हिन्दुओं की भावना को चोट पहुँचती थी। हिन्दुओं की आस्था पर ही चोट पहुंचाने के लिए गाय की खाल को उतारकर चमड़ा बनाया जाता था। प्रारंभ में कोई भी हिन्दू चमड़े का उपयोग नहीं करता था।
आप आज से कुछ 10 साल पहले चलें तो आपको याद आएगा कि आपके माता-पिता या दादा-दादी चमड़े के सामान आपको इस्तेमाल करने से मना करते होंगे। असल में पशुओं की हत्या करके ही या मरे पशुओं की खाल से चमड़ा बनता है और इसी का उपयोग हिन्दू बड़े शान के साथ करते हैं।
अच्छा आपने कभी यह सोचा है कि एक खास जानवर की खाल से चमड़ा क्यों नहीं बनाया जाता है? वह जानवर एक धर्म में हराम है. तो क्या उसकी खाल से चमड़ा क्या बन नहीं सकता है?
इसका जवाब यही है कि विदेशी MUSLIM ने उस जानवर को हाथ ही नहीं लगाया था। खासकर बात हो INDIAN की तो भारत में मरे पशु की SKIN से कभी कुछ नहीं बनाया गया था। यह LEATHER HINDU धर्म की चीज ही नहीं है। लेकिन जानकारी के अभाव में आज LEATHER की चीजें HINDU लोग बड़े गर्व के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।दुसरे

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 चैम्पकैश कया है ?
 चैम्पकैश कयु करे?
 कया कम्पनी पैसा देती है ?
 चैम्पकैश कभी भाग गई या बंद हो गई तो ?
फ्री फ्री फ्री
 साथीयो ये सभी सवाल हमे सुनने को मिलते है जब हम किसी को जोईन करवाते है तो .....

 चैम्पकैश एक भारतीय कम्पनी है ईसे हमारे प्रिय श्री महेश वर्मा जी ने मई 2015 मे मार्केट मे उतारा था ||


-  मकसद सिर्फ एक ही है कि भारत मे बेरोजगारी को जड से उखाड फेंकना है कम्पनी लोगो से बिना कोई पैसा लिये लाखो रूपये हर महिने कमाने का मोका दे रही है ||

-  चैम्पकैश कम्पनी कभी भी भविश्य मे बंद नही हो सकती कयु कि कम्पनी लोगो को जो पैसा देती है वो पैसा उन सभी कम्पनी से लिया जाता है जो कम्पनीया चैम्पकैश के साथ अपनी Advertising करवाने के लीये जुडी हुई है और हम उन कम्पनी के ऐप अपने मोबाईल मे ईंस्टाल करते है तब वो कम्पनीया हमे पैसा देती है ना कि चैम्पकैश कि जैब से कोई पैसा नही लगता ईस लिये कम्पनी को कभी कोई नुकशान नही हो सकता और जब कोई नुकशान नही होगा तो कम्पनी बंद नही होगी

-  एक और बात बहुत अच्छी है कम्पनी कि ईंकम जनरेट होती सर्कुलेट नही होती किसी कि जैब को काट कर हम अपना घर नही भर रहे है

Company Info :-
Champion Networks Pvt. Ltd.,
Registered Government of India

REGISTRATION NUMBER:- U35990HR2015PTC054530
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SCO- 29, Main Market, sector-14, Karnal, Haryana, India.
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सोमवार, 13 मार्च 2017

pm modi ke sath chalne wale SPG ke hath me breefkes ka raj

आपने देखा होगा जब प्रधानमंत्री का काफिला चलता है तब कुछ काले कोट और पेंट में वेपन के साथ, और कुछ हाथ में ब्रीफ़केस लिए होता है, शायद आज कल आप सोच ही रहे होंगे की आखिर इनके बैग में होता क्या है, मैंने कई लोगो से बात की तो बोले की शायद जरुरी की फाइल्स होती होगी, कुछ लोगों ने कहा कि इसमें। परमाणु बम का पासवर्ड (रिमोट) होता है इस बैग में कुछ और ही होता है! ब्रीफकेस का यह राज भी बहुत मुश्किलों से पता चला है, क्योंकि उनकी सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एंजेसियां कोई खतरा नहीं लेना चाहती हैं। इसलिए पीएम कि सुरक्षा से जुड़ी कोई जानकारी लीक नहीं होती है।यह ब्रीफकेस कोई आम ब्रीफकेस नहीं है, अगर ऐसा कहा जाए की इसमें पीएम मोदी की जान बसती है तो कोई गलत  नहीं होगी। चलिए आपको बता देते हैं की इस ब्रीफकेस में पीएम की सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रकार की पिस्टल होती है। अगर पीएम पर कोई खतरा हो तो,  ये बॉडीगार्ड इस स्थिती में ब्रीफकेस गन निकाल सकते हैं।

छोटा सा दिखने वाला यह ब्रीफकेस किसी भी खतरे को दौरान लगभग हर तरह की गोलीबारी से पीएम कि रक्षा कर सकता है। दरअसल, यह ब्रीफकेस एक ही झटके में इतना बड़ा बन जाता है, कि पीएम को पूरा ढ़क सके। इस ब्रीफकेस पर किसी भी गोली का असर नहीं होता है। इस तरह ये ब्रीफकेस पीएम के लिए एक सुरक्षा कवच जैसा है।


प्रधानमंत्री के काफिले में जो सिक्यूरिटी होती है उसको एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन फ़ोर्स) कहा जाता है, और उनके साथ काउंटर अटैक टीम भी होती है, जो किसी भी परिस्थिति में वो जवाब दे सकती है, इन लोगों के पास अत्याधुनिक हथियार होता है, वो मिनट में दुश्मन पर काबू पा सकते है,



सिक्यूरिटी गार्ड हमेशा इस बैग के साथ मुस्तैद रहता है, आप ध्यान से देखे तो साइड एक एक छोटा सा होल है, जैसे कभी कोई खतरा महसूस होता है, तुरंत सिक्यूरिटी अपना पोजीशन ले लेता है, और दुश्मन पर हमला कर देता है,



इस ब्रीफ़केस में एक बटन होता है जिसको प्रेस करने ही, पूरा ब्रीफ़केस खुल जाता है, और ये बुलेटप्रूफ होता है. और अत्याधुनिक हथियार से लेस होता है.



तो अब आपको समझ आ गया होगा, की आखिर इस ब्रीफ़केस में क्या होता है,


मंगलवार, 7 मार्च 2017

कुदरत का वरदान सहजन


दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पुरक आहार है सहजन (मुनगा) 300 से अधि्क रोगो मे बहोत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फल्ली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है

*आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है
*सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना
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1-विटामिन सी- संतरे से सात गुना
2-विटामिन ए- गाजर से चार गुना
3-कैलशियम- दूध से चार गुना
4-पोटेशियम- केले से तीन गुना
5-प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना

*स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम,
विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है

*इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘ मोरिगा ओलिफेरा ‘ है हिंदी में इसे सहजना , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं.

*जो लोग इसके बारे में जानते हैं , वे इसका सेवन जरूर करते हैं

*सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है.

* ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है

*इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं

*इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया , साइटिका , पक्षाघात , वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है.

*मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है |

*सहजन की सब्जी के फायदे.
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सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है,
.

*इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है

*सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है

*ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है

ये भी पढ़े :   लिवर की खराबी का पक्का रामबाण उपाय वो भी सिर्फ 15 दिनों में, जरूर पढ़े और शेयर करे

*इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है

*इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है

*इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।

*इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं

*पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

*इसके बीज को चूर्ण के रूप में
पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।

*काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे
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कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

* सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग , जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है

*शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
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सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है

*सर्दी-जुखाम
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यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

*हड्डियां होती हैं मजबूत.
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सहजन में कैल्

रविवार, 5 मार्च 2017

यदुवंश का रहस्य (इतिहास) story yadav


आज जो बाते आपको बताने वाला हु वो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ।

कुछ लोग हमारे इतिहास से खिलवाड़ करके खुद को यदुवंश से जोड़नेका प्रयास कर रहे है वो तरह तरह की अफवाह फ़ेला रहे है इसके लिए अनेको तर्क देते है आज मै उनका सच आपको बताने जा रहा हु
1 कुछ लोग तर्क देते है कि वासुदेव (राजपूत)और नंदबाबा (यादव\अहीर) अलग अलग अलग जाति से थे जबकि सच ये है की दोनों क्षत्रिय यादव थे ।जबकि राजपूत शब्द तो 12वी शताब्दी तक कही भीअस्तित्व में ही नही था।
क्षत्रियों का प्रधान वंश यादव वंश है...यादव-कुल की एक अति-पवित्र शाखा ग्वालवंश है जिसका प्रतिनिधित्व नन्द बाबा करते थे .. .. बहुत से अज्ञानी दोनों को अलग -अलग वंश का बताते हैं....मूर्खों को ये मालूम नहीं की नन्द बाबा और कृष्ण के पिता वासुदेव रिश्ते में भाई थे जिसे हरिवंश पुराण में पूर्णतः स्पष्ट किया गया है....
भागवत पुराण में भी इस बात का जिक्र है.....ठीक इसी प्रकार वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी (बलराम जी की माता ) और माता यशोदा सगी बहने थी ।
ग्वालवंश में ही समस्त यादवों की कुल-देवी माँ विंध्यवासिनी देवी ने जन्म लिया था..
भागवत पुराण के अनुसार तो भगवान् श्रीकृष्ण के गोकुल प्रवास के दौरान सभी देवी-देवताओं ने ग्वालों के रूप में अंशावतार लिया था...
इसीलिए ग्वालवंशको अति-पवित्र माना जाता है।
2 कुछ महामूर्ख यादव और अहीर को भी अलग बताते है..अहि का अर्थ संस्कृत में सर्प होता है और अहीर का मतलब सर्प दमन होता है...ऋग वेद में राजा यदु का वर्णन है..इसीलिए उनके वंशज यादव-वैदिक क्षत्रिय है...ऋग वेद में महाराज यदु को वन में एकसांप को मारने की वजह से 'अहीर' की संज्ञा दी गयी है..बाद में कालिया नाग के दमन के पश्चात् श्रीकृष्ण को भी अहीर कहा गया .अहीर का अर्थ निर्भय भी होता है .
3 हरियाणा राज्य का नाम भी अहीरों के नाम पर पड़ा है पहले इसको अभिरयाणा बोला जाता था समय के साथ भाषा के बदलाव के कारण अहिराना - हीराना -हरियाणा हो गया ।
4 आज कल कुछ मुर्ख लोग बोल रही है श्री कृष्ण राजपूत है और ये खुद को यदुवंश से जोड़ने लगे इसके लिए तर्क देते है कि मथुरा Vrindavan और काफी जगह कृष्ण जी के साथ "ठाकुर" शब्द प्रयोग होता है इसलिए वो राजपूत है उन महामुर्खो को बता दू कि ठाकुर एक उपाधि है जिसका अर्थ होता है पालन करता ( जो गरीब और असहाय लोगो की सहयाता करता हो ) ये ठाकूर शब्द इसलिए ही प्रयोग होता है । और ठाकुर शब्द ठीक उसी प्रकार की उपाधि है जेसे चौधरी राव नम्बरदार मुखिया etc. ठाकुर मध्यप्रदेश में हरिजन जाती और up में नाई जाती भी प्रयोग करती है । वैसे भी महाभारत में साफ साफ लिखा कृष्ण जी यादव थे ।
5 आमतोर पर कहा जाता है कि कृष्ण जी ने 16000 शादिय की थी मगर सच ये है की प्राग्ज्योतिष के राजा नरकासुर ने 16000 राज कन्याओ को कैद कर रखा था श्री कृष्ण ने इस राक्षस को मारकर इन राजकन्याओ को आजाद करवाया और उनको समाजिक सुरक्षा देने के लिए आज के नारी निकेतन की तरह उनके रहने का प्रबध किया था । ये बात विष्णु पुराण और महाभारत में प्रमाणित है ।
6 तर्क दिया जाता है कि गंधारी के श्राप के कारण श्री कृष्ण के शरीर त्याग (सरस्वती नदी के तट पर) के बाद सारे यादव मर गये थे परन्तु आज भी भारत देश में यादव सबसे बड़ी जाति के रूप में मोजूद है हां श्री कृष्ण के बाद यादवी संघर्ष हुए थे (सोमनाथ के करीब) लेकिन उनमे कुछ मुर्ख यादव राजा मारे गये थे वहा आज भी 110 में से 88 गाव मोजूद है जो बादलपुरा अहीर से तलाला तक फेले है ।
7 कई जगह लिखा गया है कि समुद्र में मूसल चूर्ण डालने के कारण पटेरा(एक पणियर घास ) बना जिसकी मार से सारे यादव मारे गये थे लेकिन समुद्र किनारे प्रभास क्षेत्र मोजूद है और यादव भी मोजूद है तो फिर ये घास आज तलवार बनकर यादवों को क्यों नही मार रही..??
और जब मथुरा उत्तरप्रदेश से कृष्ण जगतगुरुम् हरीयाणा गुजरात गये साथ यादव सेना भी साथ चलने लगी गुजरात मे जहा जगह मिली वहा कृष्ण जी की यादव सेना रहने लगी तब प्रदेश से जाने जाते थे राजकोट मोरबी कच्छ प्रदेश मच्छु से जाना जाता था तब मच्छो यादव कहलाता और सोरठ मे रुके वो सोरठ के यादव पंचाल मे रुके वो पंच जन्म पंचोली यादव लेकीन हम तो कृष्ण के वंशज ऐक ही है हम क्यु पुरानि बातो का ठेका लेकर चलते है अभी भी तब हमारे बुजुर्गो जिन प्रदेश मे रहते थे वहा के यादव कहते थे मगर वो यादव नहि की हम अलग अलग है मगर उनका भी कारन है ये इस समय के व्यापारी मनुवादी सोच ने हमे पुरे भारत वर्ष मे जुदा करने का प्लान बनाया था क्यु की हिंदुस्तान मे सब से आबादी कृष्ण वंश यदुविरो की थी उनको पता था की ऐक समय वो हमारे पर राज करेंगे तब ही उस ने हमारे बिना पढे लीखे बुजुर्गो को जात मे बटवारे करवा दीये अब संभल ने का समय आ गया पुरे भा